Tuesday, 30 July 2013

खतनाक होते हैं अन्धविश्वास के परिणाम

हाल ही में एक युवक (उम्र २६) मेरे हॉस्पिटल में आया जिसकी हथेली बुरी तरह से जली हुई थी. जब मैंने उससे जलने का कारण पूछा तो जवाब सुनकर मुझे हैरानी हुई और महसूस हुआ कि हम कितनी भी तरक्की कर लें लेकिन आज भी हमारे समाज में बहुत सी रूढियां और अन्धविश्वास अपनी जगह यथास्थिति विद्यमान हैं. दरअसल उस युवक का कोई महत्वपूर्ण काम रुका हुआ था और उसने ईश्वर से मनौती मानी थी यदि मेरा फलां काम पूरा होगा तो मै अपने हाथ पर कपूर कि ज्योति जला कर आरती पूजा करूँगा. और उसने वैसा ही किया. इसके परिणामस्वरूप उस युवक का हाथ इतनी बुरी तरह से जल गया कि मुझे उसको इमरजेंसी में एक हफ्ते के लिए एडमिट करना पड़ा. इसी तरह का एक केस कुछ साल पहले भी आया था. वह अधेड उम्र की गाँव कि युवती थी जिसके पति को उसके ही रिश्तेदारों ने किसी अपराध के झूठे इलज़ाम में जेल में बंद करवा दिया था. इस पर उस महिला ने अपने हाथ पर कपूर रख कर देवी कि पूजा कर डाली और अपना हाथ बहुत ही बुरी तरह से जला बैठी.

आज मै यहाँ ये सब इसलिए लिख रहा हूँ ताकि लोग इसे पढ़े और सीख लें कि कोई भी ईश्वर किसी मुराद को पूरा करने के लिए कभी अपने बनाये हुवे बन्दों को इस प्रकार कि प्रताडना नही देना चाहता. पूजा-पाठ अपनी जगह है और इसे करना न करना आपने अपने बुद्धि और विवेक पर निर्भर करता है लेकिन खुद को इस प्रकार का भयंकर कष्ट देने से पहले एक बार उसके परिणाम के बारे में अवश्य विचार करें. किसी भी पुराण आदि में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा कि कलयुग में ईश्वर इस तरह के क्रिया कलापों से प्रसन्न होकर मनवांछित वर प्रदान करंगे. आपका शरीर उसी इश्वर कि देन है इसकी कद्र करें और अच्छे कामो में खून-पसीना बहाएं. मेरे हिसाब से तो लोगों को इस तरह कि मन्नत मांगने कि बजाये ये प्रण लेना चाहिए कि कोई काम बनेगा तो गरीबो को खाना खिलाऊंगा या अनाथालय में दान करूँगा, सड़क के किनारे पेड़ लगाऊंगा, बेईमानी छोड़ दूँगा आदि.